जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए हमले में 40 जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी और देश के लिए शहीद हो गए। पुलवामा हमले पर एक तरफ तो सम्पूर्ण देश शोक में डूबा है तो वहीं दूसरी तरफ पुरे देश में गुस्सा भी है।

इसी कड़ी में अब चंबल के दस्यु सरगना मलखान सिंह का भी नाम जुड़ गया है। दरअसल मलखान ने पुलवामा आतंकी हमले के मामले में पाकिस्तान को ललकारा है। डाकू मलखान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में 700 बागी बचे हैं। अगर सरकार चाहे तो बिना शर्त, बिना वेतन हम बॉर्डर पर देश के लिए मर मिटने को तैयार हैं।

दरसल उन्होंने कहा, 15 साल बीहड़ों में कथा नहीं बांची है। मां भवानी की कृपा रही, तो मलखान सिंह का कुछ नहीं बिगड़ेगा। हां, पाकिस्तान को जरूर धूल चटा दूंगा। गांव व जिले का बागी रहा हूं। देश का नहीं।

चुनाव लड़ने की है इच्छा

दरअसल मंगलवार को डाकू मलखान सिंह पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देने कानपुर आए थे। यहां बीजेपी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा जब वादे पूरे नहीं करोगे तो हारोगे ही। मप्र में इसीलिए हार गए।

मलखान सिंह ने आगे कहा कि अगर लोकसभा चुनाव में टिकट मिलती है, तो जरूर लड़ूंगा। इसके अलावा उन्होंने कहा कि पुलवामा में हुए आतंकी हमले का बदला जरूर लेना चाहिए।

पाकिस्तान में घुस कर उसकी धज्जिया उड़ाने का वक्त आ गया है।

अन्याय के खिलाफ करेंगे राजनीति

मलखान सिंह ने इस मौके पर यह भी कहा कि, “मैंने साल 1982 में आत्मसमर्पण किया था। तब अर्जुन सिंह मप्र के मुख्यमंत्री थे। यह आत्मसमर्पण इंदिरा गांधी की परमीशन पर हुआ था। मैंने मंच से ऐलान किया था कि यदि कोई महिला शिनाख्त कर दे कि मलखान सिंह ने चांदी की भी अंगूठी उतारी हो तो इसी मंच के सामने फांसी पर लटका दिया जाए। हम अन्याय के खिलाफ राजनीति करेंगे। हम राजनीती पेट भरने के लिए नहीं करेंगे। हमारी प्राथमिकता जनता की समस्याओं को हल करना है।”

हम देश के बागी नहीं हैं

मलखान के मुताबिक बीहड़ में मेरा इतिहास बहुत ही साफ सुथरा रहा है। बागियों का इतिहास ठोस रहा है, इतना तो साधु संतो का भी नहीं रहा है। साधू तो घेरे में आ चुके हैं। अपने कर्मो के कारण जेल में पड़े हैं। लेकिन बागियों के विषय में कोई एक बात बता दे। मलखान ने कहा कि हम गांव और जिले के बागी रहे हैं पर देश के बागी कभी नहीं हुए और न होंगे।

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