वर्ष 2006 में चाकुलिया प्रखंड कार्यालय में पदस्थापित सहायक उर्दू अनुवादक मो. इस्माइल बुधवार को पदभार ग्रहण करने पहुंचे। आश्चर्य तो यह है कि पदस्थापना के 13 वर्षों बाद कर्मचारी अपने कार्यालय पहुंचे।

30 जनवरी को पहुचे ड्यूटी पर

उससे भी बड़ा आश्चर्य यह कि गुरुवार 31 जनवरी को सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पूर्व योगदान करने पहुंचे हैं।मूल रूप से बिहार स्थित कटिहार के निवासी मोहम्मद इस्माइल से सेवानिवृत्ति से एक दिन पूर्व योगदान देने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। वे मिर्गी की बीमारी से पीड़ित थे। इसी बीच गांव में बाढ़ आ जाने से घर में रखे सभी कागजात भी पानी में बह गए थे। इन समस्याओं के कारण ही वे इतने लंबे समय से कार्यालय से गायब चल रहे थे।सहायक उर्दू अनुवादक मो. इस्माइल ने वर्ष 2006 में पदस्थापना के बाद से कभी कार्यालय नहीं पहुंचे। यहां तक कि गायब होने का कारण भी नहीं बताया। 31 जनवरी को सेवानिवृत्ति है और 30 जनवरी को योगदान करने चाकुलिया प्रखंड कार्यालय पहुंचे।

13 वर्ष बाद सेवामुक्त होने के एक दिन पहले योगदान करने चाकुलिया प्रखंड कार्यालय पहुंचने पर अन्य कर्मचारियों में भी कौतूहल छा गया है। हालांकि मो. इस्माइल ने अपने सारे दस्तावेज प्रखंड कार्यालय के क्लर्क सत्येंद्र महतो को सुपुर्द कर दिया। बीडीओ लेखराज नाग के जमशेदपुर मीटिंग में रहने के कारण उनका योगदान नहीं हो सका।

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क्लर्क सत्येंद्र महतो ने बताया कि उनके द्वारा दिए गए दस्तावेज कार्मिक एवं प्रशासनिक विभाग को समर्पित किए जाएंगे। प्राप्त आदेश के अनुसार ही कार्यवाही की जाएगी।

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