भारत में ‘भारतीय सेना दिवस’ देश के जांबाज रणबांकुरों की शहादत पर गर्व करने का एक विशेष मौका है।

भारतीय सेना दिवस (थल सेना दिवस)

सेना के त्याग और बलिदान पर हमें गर्व है, भारतीय सेना के शौर्य की कई कहानियां मशहूर है। इन कहानियों में न सिर्फ विजय के किस्से मौजूद है बल्कि देश के उन जांबाजों की बातें भी हैं जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने अदम्य साहस का परिचय दिया है। 125 करोड़ लोगों के लिए सेना के जवान अपनी जान हथेली पर लेकर चलते हैं।’ सेना दिवस मनाने की परंपरा भारतीय सेना के पहले कमांडर इन चीफ़ लेफ्टिनेंट जनरल केएम करियप्पा के सम्मान में 1949 से शुरू की गई। तब से हर वर्ष सेना के सभी कमांड हेड-क्वार्टर और देश की राजधानी दिल्ली में आर्मी परेड और कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।थल सेना दिवस 15 जनवरी

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15 जनवरी को क्यों मनाया जाता है सेना दिवस

15 जनवरी, 1949 के बाद से ही भारत की सेना ब्रिटिश सेना से पूरी तरह मुक्त हुई थी, इसीलिए 15 जनवरी को “थल सेना दिवस” घोषित किया गया।

सेना दिवस का उद्देश्य

देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहूति देने वाले वीर सपूतों के प्रति श्रद्धांजलि देना ही सेना दिवस का मुख्य उद्देश्य है।

भारतीय सेना दिवस 15 जनवरी

आज के दिन सेना प्रमुख द्वारा ‘दुश्मनों को मुँहतोड़ जवाब देने वाले जवानों और जंग के दौरान देश के लिए बलिदान करने वाले शहीदों की विधवाओं को सेना पदक और अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है’

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