सभी धर्मों के सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लगों को सरकारी नौकरियों व शैक्षणिक संस्थाओं ही नहीं , बल्कि निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में भी 12 फीसदी आरक्षण मिलेगा ।

narendra modi 2019 reservation

2019 के आम चुनाव के लिए ‘ गेमचेंजर ‘ मानी जाने वाले घोषणा से संबंधित संविधान का 124वं संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया गया । | सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत ने विधेयक पेश करते हुए मंगलवार को कहा , सामान्य वर्ग आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सके इसलिए सरकार संविधान संशोधन बिल लाई है इसे बुधवार राज्यसभा से पारित कराने की योजना है । चर्चा के दौरान राजद , एआईएमआईएम को छोड़कर सभी दलों ने विल समर्थन किया । कांग्रेस ने भी समर्थन करते हुए इसे संयुक्त संसदीय समिति में भेजने मांग की । गहलोत ने कहा , अधिकारों के बराबर बंटवरे व समन अवसर उपलब्ध कराने के लिए सामान्य वर्ग के गरीबों को मुख्यधारा में साना जरूरी है । इस दिशा में मोदी सरकार ने आजादी के बाद गहली ईमानदार कोशिश की शादी के बाद । लंबे समय से इसकी मांग की जा रही थी । इसके पूर्व 21 बार प्राइवेट मेंबर विल से ऐसा आरक्षण देने की मांग हुई

सामाजिक आधार पर आरक्षण 50 से ज्यादा नहीं सकता लेकिन आर्थिक आधार पर सीमा 50 % से ज्यादा हो सकती है

modi aarakshan neeti 2019

विपक्ष पहले सामान्य वर्ग को आरक्षण की मांग करते हुए तंज कसता था । अब आप विरोध नहीं कर रहे तो खुलकर रामर्थन करिए । कांग्रेस और अन्य पार्टियों ने ऐसे आरक्षण की बात कही थी । आज कांग्रेस की परीक्षा है । समर्थन कीजिए तो बड़े मन से कीजिए । पहले इसके लिए सही रास्ता नहीं चुना गया । इसलिए सुप्रीम कोर्ट में रद्द हो गया । हमने संविधान संशोधन का रास्ता चुना । सामाजिक आधार पर आरक्षण 50 से ज्यादा नहीं सकता । आर्थिक आधार पर सीमा 50 % से ज्यादा हो सकती है क्योंकि जातिगत आरक्षण में अलग है । – अरुण जेटल्नी , वित्त मंत्री

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मौजूदा कोटे से अलग होगा कोटा

प्रस्तावित आरक्षण मौजूदा 19 . 5 फीसदी कोटे से अलग होगा । संविधान अनुच्छेद 15 में 15 , 6 जोड़ा गया है , जिसके अनुसार राज्य और भारत सरकार को इस संबंध में कानून बनाने से नहीं रोका जा सकेगा । अनुच्छेद 16 में एक बिंदु जोड़ा जाएगा , जिसके अनुसार राज्य और केंद्र 10 फीसदी आरक्षण दे सकते हैं ।

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, सरकार ने इस आरक्षण धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जो अच्छी बात है कल तक आरक्षण का विरोध करने वाले इसने पक्ष में आए । आजादी के बाद सवर्ण भी गरीब हुए हैं । उनके आरक्षण की बात करना । | गलत नहीं है । हमारा आग्रह है कि 60 फीसदी आरक्षण को नौवी अनुसनी में डाल दिया , ताकि मामले कोर्ट में न जा सके । निजी क्षेत्र और न्यायिक सेवा में भी 60 फीसदी आरक्षण लागू हो

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