स्थानान्तरण विधेयक,  Transfer Bill 2017,

उत्तराखण्ड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानान्तरण विधेयक, 2017

(उत्तराखण्ड विधेयक संख्या वर्ष 2017)

rule or regulation in transfer uttrakhand uttar pradesh
transfer act 2017


 

उत्तराखण्ड लोक सेवकों के वार्षिक स्थानान्तरण आदि के लिए एक उचित,  निष्पक्ष, वस्तुनिष्ठ तथा पारदर्शी स्थानान्तरण प्रक्रिया निर्धारित करने हेतु  विधेयक-

भारत गणराज्य के अड़सठवें वर्ष में उत्तराखण्ड विधान सभा द्वारा निम्नलिखित रूप में अधिनियमित होः-

1. (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम ’उत्तराखण्ड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानान्तरण अधिनियम, 2017’ है।(2) यह तुरन्त प्रवृत्त होगा।
(3) यह अधिनियम अखिल भारतीय सेवा, राज्य सिविल सेवा तथा राज्य पुलिस सेवा को छोड़कर अन्य सभी राज्याधीन सेवाओं के लिए लागू होगी और इसे राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा निगम, परिषद् तथा स्थानीय निकायों पर भी लागू कर सकेगी।

अध्यारोही प्रभाव
  2. यह अधिनियम इससे पूर्व बनाई गई किसी अन्य सेवा नियमों मंे, किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी प्रभावी होंगी।

परिभाषाएं.   3. जब तक कि विषय या सन्दर्भ में कोई बात प्रतिकूल न हो, इस अधिनियम में-

(क) ‘संविधान’ से ‘भारत का संविधान’ अभिप्रेत है;
(ख) ‘सरकार’ से उत्तराखण्ड राज्य की सरकार अभिप्रेत है;
(ग) ‘राज्यपाल’ से उत्तराखण्ड के राज्यपाल अभिप्रेत है;
(घ) ‘गम्भीर रोगी’ से गम्भीर रोग से ग्रस्त कार्मिक अभिप्रेत है और गम्भीर
रोगों के अन्तर्गत कैंसर, ब्लड कैंसर, एड्स/एच0आई0वी0 (पोजिटिव), हृदय रोग (बाय पास सर्जरी अथवा एंजियोप्लास्ट्री किया गया हो), किडनी रोग (दोनों किडनी फेल हो जाने से डायलिसिस पर निर्भर, किडनी ट्रांसप्लान्ट किया गया हो अथवा एक किडनी निकाली गयी हो), ट्यूबर कुलोसिस (दोनों फेफड़े, संक्रमित हो अथवा एक फेफडा पूर्णतः खराब हों), सार्स (थर्ड स्टेज), मिर्गी, मानसिक रोग अथवा कोई अन्य ऐसा रोग, जिसके कारण कार्मिक की किसी क्षेत्र विशेष में तैनाती उचित न होने की संस्तुति राज्य मेडिकल बोर्ड द्वारा की गई हो, और जिसका अनुमोदन अधिनियम की धारा 27 के अधीन गठित समिति द्वारा किया गया हो, सम्मिलित हैं;
(ङ) ‘विकलांगता’ से ऐसी विकलांगता अभिप्रेत है, जिसमें पूर्ण अन्धापन, दोनों पांव रहित, एक अपूर्ण पांव, लकवा ग्रस्त (एक हाथ या एक पांव) अथवा ’प्रतिशत विकलांगता’ के सन्दर्भ में 40 प्रतिशत से अधिक विकलांगता सम्मिलित हैं;
(च) ‘सक्षम प्राधिकारी का प्रमाण-पत्र’ से गम्भीर रोग के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, पोस्ट गे्रजुएट इंस्टिट्यूट आॅफ मेडिकल साइंसेज, राज्य मेडिकल बोर्ड, राज्य के अधिकृत मेडिकल संस्थान अथवा राज्य चिकित्सा विभाग द्वारा राज्य/जनपद स्तर के निर्दिष्ट प्राधिकारी/समिति द्वारा जारी प्रमाण-पत्र तथा विकलांगता के लिए सम्बन्धित अधिनियम में दिए गए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र अभिप्रेत है;
(छ) ‘स्वस्थता प्रमाण-पत्र’ से गम्भीर रोग अथवा विकलांगता की श्रेणी के कार्मिकों द्वारा उपचाराधीन होने/विकलांगता के बावजूद अपने पदीय कर्तव्य का निर्वहन करने के लिए उपयुक्त होने विषयक मेडिकल
बोर्ड/सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी प्रमाण-पत्र अभिप्रेत है;
(ज) ‘वरिष्ठ कार्मिक’ से प्रत्येक वर्ष की आधार तिथि 31 मई केा पुरूष कार्मिक के सन्दर्भ में 55 वर्ष एवं महिला कार्मिक के सन्दर्भ में 50 वर्ष की आयु अथवा उससे अधिक आयु पूर्ण करने वाला कार्मिक अभिप्रेत  हैं;
(झ) ‘सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र’ से इस अधिनियम के अधीन जिलेवार परिशिष्ट-1, 2 एवं 3 में उल्लिखित सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र अभिप्रेत है;
(ञ) ‘तैनाती स्थान’ अथवा ‘तैनाती स्थल’ से कार्मिक के स्थानान्तरण हेतु विचार के समय उसकी तैनाती का स्थान/स्थल अभिप्रेत है।


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कार्मिकों की पदस्थापना हेतु वर्गीकरण


4. कार्मिकों की पदस्थापना हेतु निम्नांकित श्रेणियों में वर्गीकृत किया जायेगा;


अर्थात्:-    (1) ऐसे कार्मिक, जिनकी पदस्थापना जनपद मुख्यालय से ग्राम स्तर तक किए जाने की व्यवस्था है;

(2) ऐसे कार्मिक, जिनकी पदस्थापना जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, विकास खण्ड मुख्यालय तथा स्थानीय निकाय मुख्यालय पर किए जाने की व्यवस्था है;

(3) ऐसे कार्मिक, जिनकी पदस्थापना केवल जनपद मुख्यालय पर किए जाने की व्यवस्था है। सुगम एवं दुर्गम स्थलों का चिन्हांकन और उसका प्रकटीकरण

5. (1) प्रत्येक विभाग का कार्यालयाध्यक्ष/विभागाध्यक्ष, यथास्थिति, धारा 4 में उपबन्धित वर्गीकरण के अनुसरण में जिलेवार परिशिष्ट-1,2 एवं 3 के मानक एवं चिन्हीकरण की तिथि को स्थलीय स्थिति के अनुसार सुगम एवं दुर्गम क्षेत्रों से सम्बन्धित कार्य स्थल को स्पष्ट करते हुए चिन्हांकन की कार्यवाही करेगा और उसके प्रकटीकरण के लिए उत्तराखण्ड की वेबसाइड में प्रदर्शन सहित ऐसी समुचित कार्यवाही करेगा, जैसा प्रकाशन एवं व्यापक प्रचार प्रसार के लिए आवश्यक हो।

(2) ऐसे विभाग, जिनके सभी कार्यस्थल अधिनियम के परिशिष्टों में निर्धारित मानकानुसार किसी एक श्रेणी में ही (अर्थात सभी सुगम अथवा सभी दुर्गम) वर्गीकृत होने के कारण अधिनियम के प्राविधानों को लागू करना कठिन हो, वहाॅ विभाग द्वारा अपनी विशिष्ट परिस्थितियों के दृष्टिगत अधिनियम की धारा 27 के अन्तर्गत गठित समिति के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए मानकों का पुनर्निधारण किया जा सकेगा।

 

 

वार्षिक स्थानान्तरण के  प्रकार


6. वार्षिक स्थानान्तरण के निम्नलिखित प्रकार होंगे; अर्थात्:-
(क) सुगम क्षेत्र से दुर्गम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण;
(ख) दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण; और
(ग) अनुरोध के आधार पर स्थानान्तरण।

सुगम क्षेत्र से दुर्गम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण के मानक
7. सुगम क्षेत्र से दुर्गम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण के निम्न मानक होंगे; अर्थात्:-
(क) ऐसे कार्मिक, जो सुगम क्षेत्र में वर्तमान तैनाती स्थल पर 04 वर्ष या उससे अधिक अवधि से तैनात हैं, दुर्गम क्षेत्र में उपलब्ध एवं धारा 10 के अधीन संभावित रिक्तियों की कुल संख्या की सीमा के प्रतिबन्धों के अधीन अनिवार्य रूप से स्थानान्तरित किये जायेंगे;
(ख) ऐसे कार्मिक, जो सुगम क्षेत्र में वर्तमान तैनाती स्थल पर 04 वर्ष से कम अवधि से कार्यरत हैं किन्तु उनकी सम्पूर्ण सेवा काल में सुगम क्षेत्र में तैनाती 10 वर्ष से अधिक है, उन्हें भी सुगम क्षेत्र से दुर्गम क्षेत्र में उपरोक्तानुसार रिक्तियों/पदों की उपलब्धता के प्रतिबंधों के अधीन अनिवार्य रूप से स्थानान्तरित किये जायेंगे: परन्तु यह कि सुगम क्षेत्र में कुल सेवाकाल की गणना हेतु एतद्विषयक धारा 3 में निर्दिष्ट परिशिष्टों में स्पष्ट की गयी सुगम क्षेत्र की परिभाषा के परन्तुक का भी संज्ञान लिया जायेगा;
(ग) सुगम क्षेत्र से दुर्गम क्षेत्र में स्थानान्तरित किए जाने वाले कार्मिकों को दुर्गम क्षेत्र में तैनाती सम्बन्धी न्यूनतम अवधि पूर्ण करने पर उन्हें अनिवार्य रूप से पुनः सुगम क्षेत्र में स्थानान्तरित किया जायेगा और उनके दुर्गम स्थान से अवमुक्त होने की तिथि का स्पष्ट उल्लेख उनके स्थानान्तरण आदेश में भी किया जायेगा;
(घ) निम्न श्रेणियों में आने वाले कार्मिकों को सुगम श्रेणी से दुर्गम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण से छूट होगी; अर्थात्:-   (एक) वरिष्ठ कार्मिक, (दो) ऐसे कार्मिक, जो दुर्गम क्षेत्र में पूर्व में ही न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके हों; और (तीन) धारा 3 के अधीन गम्भीर रूप से रोगग्रस्त/विकलांगता की श्रेणी में आने वाले कार्मिक, जो कि सक्षम प्राधिकारी का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करे।

स्थानान्तरण की अधिकतम सीमा


8. सुगम क्षेत्र से दुर्गम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण की अधिकतम सीमा निम्नवत् होगी; अर्थात्:- सुगम स्थान से दुर्गम स्थान में अनिवार्य स्थानान्तरण सम्बन्धित संवर्ग में दुर्गम क्षेत्र में रिक्तियों की उपलब्धता की सीमा तक किया जायेगा। स्थानान्तरण हेतु पात्र कार्मिकों की गणना सम्पूर्ण सेवा अवधि में सुगम क्षेत्र में की गयी कुल सेवा की अवधि के क्रम में की जायेगी; अर्थात् ऐसे कार्मिक, जिनकी सुगम क्षेत्र में तैनाती की अवधि 04 वर्ष से अधिक हो चुकी हो अथवा जिनकी सम्पूर्ण सेवा काल में सुगम क्षेत्र में कुल सेवा 10 वर्ष से अधिक हो चुकी हो तथा जो ”छूट“ की श्रेणी में नहीं आते हों, उन कार्मिकों को उनकी सुगम क्षेत्र में सम्पूर्ण अवधि की तैनाती के अनुसार अवरोही क्रम में रखते हुए सम्बन्धित संवर्ग के दुर्गम क्षेत्र में रिक्तियों की उपलब्धता की सीमा तक ही स्थानान्तरण हेतु चिन्हित किया जायेगा। सुगम क्षेत्र से दुर्गम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण के लिए पात्र कार्मिको की सूची तैयार करना एवं विकल्प मांगा जाना
9. सुगम क्षेत्र से दुर्गम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण के लिए दुर्गम क्षेत्र में उपलब्ध एवं संभावित रिक्तियों की सीमा में पात्र कार्मिकों की सूची तैयार की जायेगी। सूची तैयार होने के पश्चात् ऐसी सूची, दुर्गम क्षेत्र में उपलब्ध रिक्तियों तथा सूची के कार्मिकों की संभावित रिक्तियों की सूची प्रकाशित/परिचालित करते हुए पात्र कार्मिकों से अधिकतम 10 दुर्गम स्थानों, जहां वे तैनाती के इच्छुक हों, के लिए विकल्प मांगे जायेंगे। कार्मिक द्वारा विकल्प प्राथमिकता क्रम में दिया जाना अनिवार्य होगा। स्थानान्तरण हेतु पात्र कार्मिकों की सूची तथा रिक्तियों को उत्तराखण्ड की वैबसाइट पर भी प्रदर्शित किया जायेगा।

दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण के मानक

 

10. दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण के निम्न मानक होंगे; अर्थात्:-

(क) दुर्गम क्षेत्र में अपनी वर्तमान तैनाती के स्थान पर 03 वर्ष या उससे अधिक अवधि से तैनात कार्मिकों का सुगम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण किया जायेगा ;
(ख) यदि कोई कार्मिक दुर्गम स्थान पर 03 वर्ष से कम अवधि से कार्यरत है किन्तु उसकी सम्पूर्ण सेवा अवधि में दुर्गम क्षेत्र में तैनाती 10 वर्ष से अधिक है, तो वह भी दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में अनिवार्यतः स्थानान्तरित किएbजाएंगे। ऐसी गणना करने के लिए धारा 3 में निर्दिष्ट परिशिष्टों में दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा के परन्तुक का भी संज्ञान लिया जायेगा
परन्तु यह कि इस अवधि की गणना करते समय केवल वही अवधि ली जायेगी, जिसमें कार्मिक वास्तविक रूप में दुर्गम स्थान पर कार्यरत रहा हो। यदि वह सुगम स्थान पर सम्बद्ध रहा हो तो सम्बद्धता अवधि तथा एक वर्ष में एक माह से अधिक अवधि के लिए अवकाश पर रहा हो तो इस अवधि को दुर्गम स्थान की तैनाती की अवधि में सम्मिलित नहीं किया
जायेगा।

स्थानान्तरण की अधिकतम सीमा

11. दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण की अधिकतम सीमा निम्नवत् होगी; अर्थात्:-
(क) दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण सम्बन्धित संवर्ग में सुगम एवं धारा 7 के अधीन संभावित रिक्तियों की कुल संख्या की सीमा तक ही किया जायेगा।
 स्थानान्तरण हेतु पात्र कार्मिकों की गणना सम्पूर्ण सेवा अवधि में दुर्गम क्षेत्र में की गयी कुल सेवा की अवधि के क्रम में की जायेगी; अर्थात्:-
(ख) ऐसे कार्मिकों को, जो दुर्गम क्षेत्र में वर्तमान तैनाती स्थल पर 03 वर्ष से अधिक अवधि से कार्यरत है अथवा सम्पूर्णसेवा अवधि में उनकी दुर्गम क्षेत्र में तैनाती 10 वर्ष से अधिक है, को उनकी सम्पूर्ण सेवा अवधि में दुर्गम क्ष्रेत्र की तैनाती की कुल अवधि के अनुसार अवरोही क्रम  में रखते हुए संवर्ग में उपरोक्तानुसार सुगम क्षेत्र में रिक्तियों की उपलब्धता की सीमा तक ही अनिवार्य स्थानान्तरण किये जायेंगे।

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दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण के लिए पात्र कार्मिकों की सूची तैयार करना एवं विकल्प मांगा जाना
12. दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण के लिए पात्र कार्मिकों की एक सूची तैयार की जायेगी। इस प्रकार तैयार की गयी सूची, सुगम क्षेत्र में उपलब्ध रिक्तियों तथा कार्मिकों की सम्भावित रिक्तियों को प्रकाशित/परिचालित करते हुए स्थानान्तरण हेतु पात्र कार्मिकों से अधिकतम 10 इच्छित स्थानों के लिए विकल्प मांगे जाएंगे। कार्मिक द्वारा विकल्प प्राथमिकता क्रम में दिया जाना अनिवार्य होगा। स्थानान्तरण हेतु पात्र कार्मिकों की सूची तथा रिक्तियों को उत्तराखण्ड की वेबसाइट पर भी प्रदर्शित किया जायेगा।

अनुरोध के आधार पर स्थानान्तरण


13. अनुरोध के आधार पर स्थानान्तरण के लिए निम्न क्रिया अपनाई जायेगी; अर्थात्:-
(1) सुगम क्षेत्र से दुर्गम क्षेत्र में अनुरोध के आधार पर स्थानान्तरण के लिए कोई भी कार्मिक आवेदन करने हेतु पात्र होगा;
(2) दुर्गम कार्यस्थल में न्यूनतम 03 वर्ष अथवा सम्पूर्ण सेवाकाल में दुर्गम क्षेत्र में 10 वर्ष की सेवा पूर्ण करने के आधार पर सुगम क्षेत्र में स्थानान्तरण हेतु पात्र कार्मिक दुर्गम क्षेत्र में ही स्थानान्तरण हेतु अनुरोध कर सकेगा; किन्तु स्थानान्तरण हेतु इच्छुक स्थान उसके गृह विकास खण्ड के बाहर हो और ठीक पूर्व की तैनाती के स्थल पर ऐसे कार्मिक की भविष्य में पुनः तैनाती 06 वर्ष से पूर्व नहीं की जायेगी।
(3) उत्तराखण्ड सरकार की सेवा में कार्यरत पति-पत्नी सुगम अथवा दुर्गम क्षेत्र में एक ही स्थान पर तैनाती हेतु इच्छुक हों तो वे तद्नुसार सुगम अथवा दुर्गम क्षेत्र में एक स्थान पर तैनाती हेतु अनुरोध करने के पात्र होंगे। किन्तु ऐसी तैनाती के उपरान्त जब भी पति/पत्नी किसी कार्य स्थल पर 04/03 वर्ष अथवा सेवाकाल कुल 10 वर्ष सम्बन्धी मानक पूर्ण करेंगे, तब पति-पत्नी, यथा लागू, सामान्य स्थानान्तरण के पात्र हो जायेगें ।
(4) कार्मिक स्वयं अपनी अथवा पति/पत्नी (यथा लागू) धारा-3 के खण्ड (घ) में यथानिर्दिष्ट गम्भीर रोगग्रस्तता विकलांगता के आधार पर ऐच्छिक क्षेत्र/स्थान में अनुरोध के आधार पर स्थानान्तरण हेतु आवेदन करने हेतु पात्र होंगे;
(5) मानसिक रूप से विक्षिप्त अथवा ऐसे रोगग्रस्त बच्चे जो पूर्णतः लाचार है तथा देखभाल/नित्यक्रिया आदि के लिए पूर्णतः किसी अन्य पर निर्भर है, के माता-पिता, मेडिकल बोर्ड के एतद्विषयक प्रमाण-पत्र के आधार पर अपने बच्चे की चिकित्सा की समुचित व्यवस्था के लिए दुर्गम से सुगम अथवा  सुगम से दुर्गम क्षेत्र/स्थान में स्थानान्तरण के अनुरोध करने हेतु पात्र होंगे;
(6) विधवा, परित्यक्ता तथा वरिष्ठ कार्मिक अनुरोध के आधार पर ऐच्छिक क्षेत्र में स्थानान्तरण हेतु आवेदन करने के पात्र होंगे। टिप्पणीः अनुरोध के आधार पर स्थानान्तरण हेतु आवेदन धारा 12 के अधीन प्रकाशित रिक्तियों के सापेक्ष ही किया जा सकेगा और भरे हुए पदों/कार्यस्थलों के लिए अनरोध अनुमन्य न होगा।

अनुरोध के आधार पर स्थानान्तरण हेतु आवेदन-पत्र मांगा जाना


14. उपलब्ध रिक्तियों तथा सम्भावित रिक्तियों को सम्बन्धित कार्यालयों के नोटिस बोर्ड तथा उत्तराखण्ड की वेबसाइट पर प्रदर्शित करते हुए कार्मिकों से अनुरोध के आधार पर स्थानान्तरण हेतु अधिकतम 10 इच्छित स्थानों के लिए विकल्प के साथ आवेदन-पत्र मांगे जाएंगे। कार्मिक द्वारा विकल्प प्राथमिकता क्रम में दिया जाना अनिवार्य होगा।

स्थानान्तरण हेतु गणना के लिए नियत तिथि का निर्धारण


15. स्थानान्तरण के उद्देश्य से अवधि की गणना प्रत्येक वर्ष की 31 मई की तिथि के आधार पर की जायेगी।

स्थानान्तरण समिति का गठन एवं समिति के दायित्व

16. (1) कार्मिकों के स्थानान्तरण किए जाने हेतु शासन स्तर पर, विभागाध्यक्ष, मण्डल एवं जनपद स्तर पर प्रत्येक विभाग द्वारा स्थायी स्थानान्तरण समितियों का गठन किया जायेगा, जिसमें सम्बन्धित विभाग के अधिकारियों के अतिरिक्त एक अधिकारी दूसरे विभाग के भी नामित किए जायेंगे। शासन स्तर पर वन एवं अवस्थापना विकास आयुक्त शाखा, कृषि उत्पादन युक्त शाखा तथा समाज कल्याण आयुक्त शाखा को छोड़कर अन्य विभागों में स्थानान्तरण समिति में एक अधिकारी कार्मिक विभाग द्वारा नामित किया जायेगा। उपर्युक्त तीनों शाखाओं के अधीन विभागों में स्थानान्तरण हेतु स्थानान्तरण समिति में शाखा के किसी अन्य विभाग के अधिकारी का नामांकन सम्बन्धित शाखा प्रमुख द्वारा किया जायेगा।
(2) जनपद स्तरीय संवर्गों के कार्मिकों के जनपद के अन्दर ही स्थानान्तरणहेतु बनाई गई प्रत्येक समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी या उनके द्वारा नामित अधिकारी होंगे।
(3) वार्षिक स्थानान्तरण हेतु प्राप्त सभी प्रस्ताव, आवेदन पत्र एवं विकल्प तथा दुर्गम एंव सुगम क्षेत्रों की रिक्तियों के विवरण सम्बन्धित विभाग द्वारा इस हेतु गठित समिति के सम्मुख प्रस्तुत किए जायेंगे। उपरोक्त धारा 9, 12 एवं 13 के अनुसार स्थानान्तरण हेतु पात्र कार्मिकों की सत्यापित सूची भी स्थानान्तरण समिति के समक्ष रखी जायेगी।
(4) समिति स्थानान्तरण हेतु आवेदन करने वाले प्रत्येक कार्मिक, जिसका विवरण समिति के समक्ष रखा गया है, के सम्बन्ध में इस अधिनियम में दिये गये उपबन्धों के आधार पर विचार करके कार्यवृत्त तैयार करेगी, जिसमें स्थानान्तरित होने वाले कार्मिकों को रिक्ति आवंटित होने/करने का आधार यथा ‘विकल्प’, ‘स्वयं के अनुरोध’, ‘चिकित्सा’, ‘विकलांगता’, ‘वरिष्ठ कार्मिक’ आदि स्पष्टतः अंकित किया जायेगा। समिति अपने कार्यवृत्त में एक अलग सूची में उन कार्मिकों के सम्बन्ध में भी कारण सहित उल्लेख करेगी, जिनका स्थानान्तरण अधिनियम के अनुसार संस्तुत किया जाना संभव नहीं हो सका है।
(5) स्थानान्तरण समिति की संस्तुति के अनुसार स्थानान्तरण आदेश सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्गत किए जायेंगे। स्थानान्तरण समिति द्वारा स्थानान्तरण प्रस्तावों पर विचार किया जाना
17. (1) इस अधिनियम के अन्तर्गत स्थानान्तरण के प्रस्तावों पर गठित स्थानान्तरण समिति द्वारा निम्न क्रमानुसार विचार किया जाएगा:-
(क) सुगम स्थान से दुर्गम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण: स्थानान्तरण समिति द्वारा सर्वप्रथम सुगम क्षेत्र से दुर्गम क्षेत्र मंे अनिवार्य स्थानान्तरण पर विचार किया जायेगा; अर्थात् – सर्वप्रथम स्थानान्तरण सुगम क्षेत्र में सम्पूर्ण सेवा अवधि में सबसे अधिक अवधि व्यतीत करने वाले कार्मिक से प्रारम्भ किये जायेंगे और दुर्गम क्षेत्र की रिक्ति के लिए कार्मिक द्वारा दिये गये विकल्प को स्वीकार किया  जायेगा; अर्थात् – सम्पूर्ण सेवा अवधि में सुगम स्थान पर तैनात रहे सबसे अधिक अवधि के कार्मिक से प्रारम्भ करते हुए अवरोही क्रम (क्मेबमदकपदह व्तकमत) में एक-एक करके कार्मिकों पर विचार किया जायेगा और विकल्प के अनुसार उपलब्ध रिक्ति उन्हें आवंटित की जायेगी ; परन्तु यह कि यदि स्थानान्तरण हेतु चिन्हित कार्मिकों में से एक से अधिक कार्मिकों ने दुर्गम क्षेत्र की चिन्हित किसी रिक्ति विशेष हेतु समान प्राथमिकता क्रम में विकल्प दिया है तो ऐसी रिक्ति विकल्प देने वाले कार्मिकों में से ऐसे कार्मिक को आवंटित की जायेगी, जिसने सुगम क्षेत्र में सबसे कम अवधि की सेवा की हो ;
परन्तु यह और कि यदि उक्तानुसार विचार करने के पश्चात् भी कतिपय ऐसे कार्मिक अवशेष रहते हैं, जिन्हें उनके द्वारा दिये गये विकल्प के अनुसार इच्छित स्थान प्राप्त नहीं हो सका है अथवा ऐसा कोई कार्मिक
है, जिसने विकल्प नहीं दिया है तो स्थानान्तरण समिति द्वारा ऐसे अवशेष कार्मिकों तथा अवशेष उपलब्ध रिक्तियों की सूची उनके मूल प्रकाशन/ चिन्हीकरण के क्रमानुसार तैयार की जायेगी तथा प्रत्येक कार्मिक को सूची में उसके क्रमानुसार रिक्तियों की सूची में समान क्रम में अंकित रिक्ति आवंटित कर दी जायेगी।


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(ख) अनुरोध के आधार पर स्थानान्तरण:-

खण्ड (क) के अनिवार्य स्थानान्तरण के पश्चात् अनुरोध के आधार पर स्थानान्तरण हेतु पात्र कार्मिकों के स्थानान्तरण पर स्थानान्तरण समिति द्वारा निम्नलिखित क्रम में विचार किया जायेगा:-
(एक) उत्तराखण्ड सरकार की सेवा में कार्यरत पति/पत्नी, द्वारा समान श्रेणी के स्थल/क्षेत्र में तैनाती हेतु अनुरोध;

(दो) गम्भीर रूप से रोगग्रस्त/विकलांग कार्मिकों द्वारा स्वयं अथवा पति/पत्नी (यथालागू) की गंभीर रोगग्रस्तता/विकलांगता के आधार पर अनुरोध;

(तीन) मानसिक रूप से विक्षिप्त एवं लाचार बच्चों के माता पिता द्वारा अनुरोध;

(चार) विधवा,परित्यक्ता तथा वरिष्ठ कार्मिक द्वारा अनुरोध;

(पाँच) दुर्गम कार्यस्थल से दुर्गम कार्यस्थल/क्षेत्र में स्थानान्तरण हेतु अनुरोध;

(छः) अन्त में, सुगम क्षेत्र से दुर्गम क्षेत्र में स्थानान्तरण हेतु अनुरोध;

(ग) दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण:-


स्थानान्तरण समिति द्वारा खण्ड (क) तथा खण्ड (ख) में उल्लिखित स्थानान्तरण पर विचार करने के पश्चात् दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में अनिवार्य स्थानान्तरण को निम्नवत् निस्तारित किया जायेगा:-
 (एक) दुर्गम क्षेत्र से सुगम क्षेत्र में स्थानान्तरण हेतु पात्र कार्मिकों को उनकी सम्पूर्ण सेवा अवधि में दुर्गम क्षेत्र में की गयी कुल सेवा के अनुसार अधिकतम अवधि के क्रम में सबसे अधिक अवधि के कार्मिक से प्रारम्भ करते हुए अवरोही क्रम  में सूचीबद्ध किया जायेगा;
(दो) उपर्युक्त के अनुसार तैयार की गई सूची में से उत्तराखण्ड सरकार की सेवा में कार्यरत पति/पत्नी को रिक्ति की स्थिति में ऐच्छिक स्थान आवंटित किया जायेगा;
  (तीन) सूची में से दुर्गम स्थान पर तैनात रहे सबसे अधिक अवधि के कार्मिक से प्रारम्भ करते हुए रिक्ति की उपलब्धता के अनुसार ऐच्छिक स्थान आबंटित किया जायेगा। इसी क्रम में अन्य कार्मिकों को भी अवरोही क्रम में ऐच्छिक स्थान रिक्ति उपलब्ध होने पर आबंटित किया जायेगा ; परन्तु यह कि यदि सुगम क्षेत्र की किसी रिक्ति विशेष के लिए एक से अधिक कार्मिकों द्वारा समान प्राथमिकता क्रम में विकल्प दिया जाता है तो ऐसी रिक्ति ऐसे कार्मिक को आबंटित की जायेगी, जिसने दुर्गम क्षेत्र में सबसे अधिक सेवा की हो ; परन्तु यह और कि यदि उपरोक्तानुसार विचार करने के पश्चात भी कतिपय ऐसे कार्मिक अवशेष रहते हैं, जिन्हें उनके द्वारा दिये विकल्प के अनुसार रिक्त स्थान उपलब्ध न हो सके, तो स्थानान्तरण समिति द्वारा अवशेष कार्मिकों तथा अवशेष उपलब्ध रिक्तियों की सूची उनके मूल प्रकाशन/चिन्हीकरण के क्रमानुसार तैयार की जायेगी तथा प्रत्येक कार्मिक को सूची में उसके क्रमानुसार रिक्तियों की सूची में समान क्रम में अंकित रिक्ति आबंटित कर दी जायेगी।

(2) स्थानान्तरण समिति कार्मिकों द्वारा स्थानान्तरण हेतु दिए गए विकल्पों पर विचार करते समय निम्नलिखित तथ्यों पर भी विचार करते हुए निर्णय लेगीः-

(क) समूह ‘क’ एवं ‘ख’ के अधिकारियों को उनके गृह जनपद में तैनात नहीं किया जायेगा;
(ख) समूह ‘ग’ के लिपिकीय एवं गैर-प्रशासकीय कार्मिकों तथा समूह ‘घ’ के कार्मिकों को गृह स्थान को छोड़कर नके गृह जनपद में ही तैनात किया जा सकेगा। ‘‘गृह स्थान’’ से ऐसा गाँव/हल्का/ तहसील आदि अभिप्रेत है, जिसका वह मूल निवासी है;
(ग) प्रशासनिक आधार पर स्थानान्तरण सुगम से सुगम में नहीं किया जायेगा तथा प्रशासनिक आधार पर हटाये गये कार्मिक को किसी भी दशा में पुनः उसी जनपद/स्थान पर 05 वर्ष तक तैनात नहीं किया जायेगा ;
(घ) सरकारी सेवकों के मान्यता प्राप्त सेवा संघों के अध्यक्ष/सचिव, जिनमें जिला शाखाओं के अध्यक्ष/सचिव भी सम्मिलित हैं, के स्थानान्तरण, उनके द्वारा संगठन में पदधारित करने की तिथि से पद पर बने रहने अथवा 02 वर्ष की अवधि, जो भी पहले हो, तक की अवधि में नहीं किये जा सकेंगे, परन्तु इस अधिनियम के शेष प्राविधान उन पर भी यथावत लागू होंगे।
(ड.) स्थानान्तरण संवर्गीय पद /कार्यस्थल के लिए ही किये जायेंगे तथा संवर्ग के बाहर (यथा जनपदीय/मण्डलीय संवर्ग के संदर्भ में अन्तर्जनपदीय /अन्तर्मण्डलीय) के पद/कार्यस्थल के सापेक्ष नहीं किये जायेंगे ;
परन्तु यह कि दो कार्मिकों के मध्य विवाह के आधार पर किसी एक कार्मिक का ऐच्छिक संवर्ग परिवर्तन/संवर्ग के बाहर स्थानान्तरण अथवा विकास योजनाओं हेतु परिसम्पत्ति अधिग्रहण/दैवीय आपदा के कारण शासन द्वारा अन्यत्र विस्थापित किए गए कार्मिक का ऐच्छिक संवर्ग परिवर्तन/संवर्ग से बाहर स्थानान्तरण इस प्रतिबन्ध के अधीन अनुमन्य होगा कि परिवर्तित/नये संवर्ग में कार्मिक को कनिष्ठतम माना जायेगा और ऐसे परिवर्तन हेतु धारा 27 में गठित समिति का अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक होगा। नियुक्ति/पदोन्नति तथा अन्य स्थानान्तरण पर तैनाती की प्रक्रिया वार्षिक/सामान्य स्थानान्तरण के अतिरिक्त निम्नलिखित स्थितियों मे भी नियुक्ति/पदोन्नति तथा अन्य स्थानान्तरणों पर तैनाती की प्रक्रिया निम्नवत् होगी:-
(1) प्रथम नियुक्ति के समय अनिवार्य रूप से दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती की जायेगी;
(2) पदोन्नति के समय अनिवार्य रूप से दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती धारा 7 के खण्ड (घ) के प्रतिबन्धों के अधीन की जायेगी ; परन्तु यह कि यदि दुर्गम क्षेत्र में पदोन्नति का पद विद्यमान/रिक्त हीं है तो पदोन्नति के बाद सुगम क्षेत्र में उपलब्ध रिक्ति के सापेक्ष तैनात या जा सकेगा;
(3) दो कार्मिकों द्वारा स्वेच्छा से एक दूसरे के स्थान पर (सुगम एवं दुर्गम अथवा दुर्गम एवं दुर्गम कार्यस्थल में) पर स्थानान्तरण हेतु आवेदन करने पर पारस्परिक स्थानान्तरण किये जायंेगे, जिसके लिए कोई यात्रा भत्ता अनुमन्य नहीं होगा तथा सुगम कार्यस्थलों में ही तैनात दो कार्मिकेां को पारस्परिक स्थानान्तरण अनुमन्य न होगा;
(4) गम्भीर शिकायतों, उच्चाधिकारियों से दुव्र्यवहार एवं कार्य में अभिरूचि न लेने आदि के आधार पर जाँच एवं आवश्यक पुष्टि के उपरान्त, जहाँ सक्षम प्राधिकारी का समाधान हो जाय, ऐसे कार्मिकों के प्रशासनिक आधार पर स्थानान्तरण किये जा सकेंगे ; परन्तु यह कि प्रशासनिक आधार पर स्थानान्तरण सामान्य प्रकार से शिकायतों के आधार पर प्रेरित होकर अथवा आकस्मिक रूप से नहीं किये जायेंगे और ऐसे स्थानान्तरणों के आदेश-पत्र में प्रशासनिक आधार अंकित किया जाना आवश्यक होगा;
(5) उपरोक्त खण्ड (1) से (4) के अनुसार की जाने वाली तैनाती/स्थानान्तरण सामान्य स्थानान्तरण से पृथक एवं भिन्न अवधि में भी सक्षम प्राधिकारी द्वारा किये जा सकेंगे और इसके लिए प्रकरण को स्थानान्तरण समिति के समक्ष ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी ; परन्तु यह कि प्रशासनिक आधार पर किये जाने वाले स्थानान्तरणों
पर सक्षम अधिकारी को एक स्तर ऊपर के अधिकारी से अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक होगा।



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दुर्गम क्षेत्र में तैनाती प्रोन्नति के लिए अनिवार्यता


 (1) प्रथम एवं द्वितीय प्रोन्नति के लिए यह आवश्यक होगा कि न्यूनतम अर्हकारी सेवा का न्यूनतम आधा भाग कार्मिक द्वारा दुर्गम स्थान पर व्यतीत किया गया हो

(2) इस अधिनियम के लागू होने की तिथि से 30.06.2020 तक की अवधि को संक्रमणकाल मानकर इस अवधि में प्रोन्नति की दशा में, यदि कार्मिक द्वारा, ऐसा आधा भाग दुर्गम स्थान पर व्यतीत नहीं किया गया हो तो प्रोन्नति पर तभी विचार किया जायेगा, जब वह यह बंधपत्र दे कि ऐसा भाग पूरा होने की अवधि तक वह अनिवार्य रूप से दुर्गम स्थान पर तैनात रहेगा ; परन्तु यह कि ऐसा कार्मिक यदि धारा 7 के खण्ड (घ) से आच्छादित होता हो तो उसे दुर्गम क्षेत्र में तैनात किए जाने अथवा बंधपत्र देने की बाध्यता न होगी ; परन्तु यह और कि यदि प्रथम पदोन्नति के समय बंधपत्र देकर दुर्गम क्षेत्र में तैनात होने वाला कार्मिक बंधपत्र अनुसार निर्दिष्ट अवधि दुर्गम क्षेत्र में पूर्ण कर लेने के उपरान्त द्वितीय पदोन्नति हेतु कुल अर्हकारी सेवा पूर्ण कर लेता है तो ऐसे कार्मिक के लिए द्वितीय पदोन्नति प्राप्त करने हेतु द्वितीय पदोन्नति के लिए कुल अर्हकारी सेवा की भी आधी अवधि दुर्गम क्षेत्र में सेवा की अनिवार्यता सम्बन्धी प्राविधान बाध्यकारी नहीं होगा; अर्थात् प्रथम बंधपत्र की अवधि के उपरान्त ऐसा कार्मिक दुर्गम क्षेत्र में, जितनी भी सेवा करने के उपरान्त द्वितीय पदोन्नति हेतु अन्य मानक पूर्ण करता हो तो
उसे द्वितीय पदोन्नति हेतु पात्र माना जायेगा
(3) प्रथम एवं द्वितीय प्रोन्नति हेतु दुर्गम क्षेत्र में न्यूनतम अर्हकारी सेवा की व्यवस्था पूर्ण रूप से 1.07.2020 से प्रभावी होगी तथा इस तिथि से प्रोन्नति हेतु न्यूनतम अर्हकारी सेवा का न्यूनतम आधा भाग दुर्गम स्थान पर व्यतीत करना अनिवार्य होगा, तभी प्रोन्नति हेतु विचार किया जाएगा। सेवा नियमावलियों में उक्त आशय का प्राविधान अलग से किया जाएगा।
(4) जो कार्मिक, अपने सेवा-काल में दुर्गम क्षेत्र में तैनात नहीं हो सके हैं, वे भविष्य में प्रोन्नति हेतु पात्र होने के लिए धारा 13 का खण्ड (1) के अनुसार दुर्गम क्षेत्र में अनुरोध के आधार पर स्थानान्तरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती पर दिया जाने वाला प्रोत्साहन
20. दुर्गम क्षेत्र मंे तैनाती की दशा में कार्मिक को प्रोत्साहन स्वरूप निम्न लाभ अनुमन्य होंगे य अर्थात्:-
(1) सुगम क्षेत्र से दुर्गम क्षेत्र में तैनाती की दशा में दुर्गम क्षेत्र में कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से दुर्गम क्षेत्र में तैनाती की अवधि तक ऐसे कार्मिक को अपनी वर्तमान तैनाती के स्थान पर अनुमन्य आवास किराया भत्ता देय होगा ; परन्तु यदि ऐसे कार्मिक को सुगम क्षेत्र में तैनाती के स्थान पर शासकीय आवास आवंटित था तो उसे शासकीय आवास रिक्त करना होगा और उसे उक्तानुसार आवास किराया भŸाा अनुमन्य होगा  परन्तु यह और कि यदि ऐसे कार्मिक को दुर्गम क्षेत्र में उसके तैनाती स्थल पर शासकीय आवास आवंटित होता है तो उसे सुगम क्षेत्र और दुर्गम क्षेत्र में मिलने वाले आवास किराये भत्ते के अन्तर की धनराशि आवास किराया प्रतिकर भत्ता के रूप में देय होगी।
(2) यदि कार्मिक द्वारा प्रोन्नति के लिए न्यूनतम अर्हकारी सेवा के आधे भाग से अधिक अवधि दुर्गम स्थान पर व्यतीत की गयी हो तो प्रोन्नति हेतु अर्हकारी सेवा के उद्देश्य से इस अधिक भाग के प्रत्येक 1 वर्ष की सेवा अवधि को 1) वर्ष के समतुल्य आगणित किया जायेगा, किन्तु प्रतिबंध यह होगा कि इस अधिनियम के लागू होने की तिथि के पूर्व से ही दुर्गम क्षेत्र में तैनात कार्मिकों को इस अतिरिक्त अवधि की गणना का लाभ संक्रमणकाल की अवधि अर्थात् इस अधिनियम के लागू होने की तिथि से 30.6.2020 तक की अवधि में की जाने वाली पदोन्नतियों के लिए अनुमन्य न होगा और 01.07.2020 के उपरान्त घटित होने वाली अतिरिक्त अवधि को ही उक्त गणना हेतु विचार किया जायेगा। सेवा नियमावलियों में उक्त आशय का प्राविधान किया जायेगा। स्थानान्तरण के अधिकार प्रदान किया जाना
21. (1) समूह ‘क’ के अधिकारियों के स्थानान्तरण, इस हेतु गठित स्थानान्तरण समिति की संस्तुति के आधार पर शासन द्वारा किये जायेंगे तथा समूह ‘ख’ के अधिकारियों के स्थानान्तरण, स्थानान्तरण समिति की संस्तुति के आधार पर संबंधित विभागों के विभागाध्यक्षों द्वारा किये जायेंगे ; परन्तु यह कि जहां विभागाध्यक्ष का पद नहीं है, वहां समूह ‘ख’ के अधिकारियों का स्थानान्तरण समिति की संस्तुति के आधार पर शासन द्वारा किए जायेंगे
(2) समूह ‘ग’ तथा ‘घ’ के जनपद स्तरीय कार्मिकों, जिनका स्थानान्तरण जनपद में ही किया जाना है, के स्थानान्तरण, स्थानान्तरण हेतु जनपद स्तर पर गठित समिति (जिला अधिकारी अथवा उनके द्वारा नामित अधिकारी की अध्यक्षता में) द्वारा की गयी संस्तुति के आधार पर नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा किये जायेंगे
(3) स्थानान्तरण हेतु धारा 23 में उल्लिखित समय-सारिणी के अनुसार इंगित तिथि के पश्चात् समूह ‘क’ तथा समूह ‘ख’ के अधिकारियों के स्थानान्तरण मुख्यमंत्री के अनुमोदन से किये जा सकेंगे तथा समूह ‘ग’ तथा समूह ‘घ’ के कार्मिकों के स्थानान्तरण, स्थानान्तरण हेतु अधिकृत सक्षम स्तर से एक स्तर ऊपर के अधिकारी द्वारा किये जायेंगे।

स्थानान्तरित कार्मिकों को अवमुक्त किया जाना
22. (1) स्थानान्तरण आदेशों में यह निर्देंश अंकित किये जायेंगे कि वे आदेश के जारी किये जाने के दिनांक से अमुक तिथि/एक सप्ताह के अन्दर प्रतिस्थानी की प्रतीक्षा किये बिना कार्यभार ग्रहण कर लें। सम्बन्धित प्राधिकारी स्थानान्तरित कार्मिकों को तद्नुसार तत्काल अवमुक्त करेंगे। स्थानान्तरण आदेश की प्रति सम्बन्धित कोषाधिकारी को भी प्रेषित की जायेगी ताकि वे स्थानान्तरित कार्मिक के स्थानान्तरण आदेश जारी होने के सात दिन पश्चात् उसका वेतन आहरित न करें। अवमुक्त होने वाले कार्मिक नियमानुसार अनुमन्य ‘कार्यभार ग्रहण अवधि  का उपभोग नव तैनाती के पद का कार्यभार ग्रहण करने के उपरान्त ही कर सकेंगे तथा अवमुक्ति के उपरान्त मात्र अनुमन्य ‘यात्रा अवधि का ही उपभोग कर सकेंगे

(2) स्थानान्तरित कार्मिकों को किसी प्रकार का अवकाश स्वीकृत नहीं किया जायेगा
(3) स्थानान्तरित किये गये कार्मिकों के द्वारा नव तैनाती के स्थान पर कार्यभार ग्रहण न करने पर उनके विरूद्ध धारा 24 के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी।
(4) स्थानान्तरित कार्मिक द्वारा स्थानान्तरण आदेश में विद्यमान किसी सारगर्भित/टंकण त्रुटि के निराकरण हेतु स्थानान्तरण आदेश निर्गत होने के 03 दिन के अन्दर स्थानान्तरण करने वाले प्राधिकारी से एक स्तर उच्च अधिकारी को प्रत्यावेदन दिया जा सकेगा, जिनके द्वारा एक सप्ताह के अन्दर स्थानान्तरण करने वाले प्राधिकारी का मंतब्य प्राप्त करते हुए ऐसे प्रत्यावेदन का निस्तारण किया जायेगा।


 स्थानान्तरण हेतु समय सारिणी


23. प्रत्येक वर्ष सामान्य स्थानान्तरण हेतु निम्नवत् समय-सारणी होगी; अर्थात्-
(1) सभी विभागों द्वारा शासन स्तर, विभागाध्यक्ष स्तर, मंडल स्तर तथा जनपद स्तर पर स्थानान्तरण समितियों का गठन किया जाना- 01 अप्रैल
(2) प्रत्येक संवर्ग के लिए सुगम/दुर्गम क्षेत्र के कार्यस्थल, स्थानान्तरण हेतु पात्र कार्मिकों तथा उपलब्ध एवं संभावित रिक्तियों की सूची प्रकाशित करना और उसे वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाना- 15 अप्रैल
(3) अनिवार्य स्थानान्तरण के पात्र कार्मिकों से अधिकतम 10 इच्छित स्थानों के लिए विकल्प मांगे जाने की तिथि- 20 अप्रैल,
(4) अनुरोध के आधार पर आवेदन आमंत्रित करने की तिथि- 30 अप्रैल
(5) उक्त 3 व 4 में विकल्प/आवेदन पत्र प्राप्त किये जाने की अंतिम तिथि- 15 मई
(6) प्राप्त विकल्पों/आवेदन-पत्रों का विवरण वेबसाइटपर प्रदर्शित किया जाना-  20 मई
(7) स्थानान्तरण समिति की बैठक तथा सक्षम प्राधिकारी को संस्तुति देने की अवधि- 25 मई से 05 जून
(8) सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्थानान्तरण आदेश निर्गत करने की अन्तिम तिथि- 10 जून
(9) निर्गत किये गये स्थानान्तरण आदेश को उत्तराखण्ड की वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाना- स्थानान्तरण  आदेश निर्गत होने के 2 दिन के अन्दर
(10) स्थानान्तरित कार्मिकों के कार्यमुक्त होने की अन्तिम तिथि- स्थानान्तरण आदेश निर्गत होने के 7 दिन के अन्दर
(11) स्थानान्तरित कार्मिकों के कार्यभार ग्रहण करने की अन्तिम तिथि- स्थानान्तरण आदेश निर्गत होने के 10 दिन के अन्दर परन्तु यह कि राज्य सरकार समय-समय पर आदेश द्वारा समय-सारिणी में आवश्यक परिवर्तन कर सकेगी।
स्थानान्तरण रोकने के लिए प्रत्यावेदन एवं सिफारिश तथा अधिनियम के उल्लंघन की दशा में दंड
24. (1) यदि स्थानान्तरित कार्मिकों द्वारा स्थानान्तरण रोकने के लिए अपने माता-पिता, पति/पत्नी अथवा अन्य सम्बन्धियों से प्रत्यावेदन प्रेषित किये जाते हैं तो उसे अनिवार्य रूप से उस कार्मिक की व्यक्तिगत पत्रावली में
रखा जायेगा और ऐसे प्रत्यावेदनों को अग्रसारित नहीं किया जायेगा तथा सम्बन्धित कार्मिक की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि में भी इस आचरण को अंकित किया जायेगाय
(2) यदि कोई सरकारी सेवक स्थानान्तरण आदेश के विरूद्ध दबाव डलवाने का प्रयास करे, तो उसके इस कृत्य/आचरण को ‘‘सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली’’ का उल्लंघन मानते हुए उसके विरूद्ध ‘‘उत्तराखण्ड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2003 (समय-समय पर यथासंशोधित) के संगत प्राविधानों के अनुसार अनुशासनिक कार्रवाई की जायेगी
(3) जो कोई, इस अधिनियम के अधीन दिए गए किसी आदेश या निदेश का, ऐसे समय के भीतर, जो उक्त आदेश या निदेश में विनिर्दिष्ट किया जाय, अनुपालन करने में असफल रहेगा या इस अधिनियम के किन्हीं उपबन्धों का उल्लंघन करेगा या उल्लंघन करने का प्रयत्न करेगा, वह ‘‘उत्तराखण्ड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2003 (समय-समय पर यथासंशोधित) के संगत प्राविधानों के अधीन दण्डनीय होगा। कार्यभार टिप्पणी 25. स्थानान्तरित समूह ‘क’ एव ‘ख’ के अधिकारी द्वारा कार्यभार से मुक्त होने से पूर्व उनके पटल के महत्वपूर्ण प्रकरणों/विकास कार्यक्रमों आदि के सम्बन्ध में एक कार्यभार टिप्पणी बनाया जाना आवश्यक होगा जिसकी एक प्रति गार्ड फाईल में रखी जायेगी और एक प्रति सम्बन्धित नियंत्रक अधिकारी को पे्रषित की जायेगी।

संगत नियमों का स्थानान्तरण आदेशों में उल्लिखित किया जाना
26. इस अधिनियम के अनुसरण में किये जाने वाले ‘‘स्थानान्तरण आदेश’’ में सम्बन्धित कार्मिक का किए गए स्थानान्तरण के सम्बन्ध में सम्बन्धित धारा तथा स्थानान्तरण की प्रक्रिया का उल्लेख किया जाना आवश्यक होगा। स्थानान्तरण आदेश निर्गत करने के पश्चात् उन्हें उत्तराखण्ड की वेबसाइट पर भी प्रदर्शित किया जायेगा।

अधिनियम के क्रियान्वयन में कठिनाई का निवारण
27. इस अधिनियम के प्रख्यापन के उपरान्त अन्य विभागों की वार्षिक स्थानान्तरण नीतियों/अधिनियमों पर इस अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होगा ; परन्तु यह कि यदि किसी विभाग द्वारा अपने विभाग की विशिष्ट परिस्थितियों के कारण इस अधिनियम के किसी प्राविधान में कोई परिवर्तन अपेक्षित हो अथवा कार्यहित में कोई विचलन किया जाना आवश्यक हो अथवा कोई छूट अपरिहार्य हो तो ऐसे परिवर्तन/विचलन/छूट हेतु प्रस्ताव सकारण मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति, जिसमें:-
(क) अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव वन एवं अवस्थापना विकास आयुक्त;
(ख) अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव कृषि उत्पादन आयुक्त;
(ग) प्रमुख सचिव, कार्मिक सदस्य होंगे, के समक्ष प्रस्तुत किये जायेंगे और
इस समिति की संस्तुति पर मुख्यमंत्री के अनुमोदन के उपरान्त ही वांछित परिवर्तन/विचलन/छूट अनुमन्य होगा। यह समिति इस अधिनियम के क्रियान्वयन में आने वाली किसी कठिनाई अथवा ऐसा अप्रत्याशित विषय,
जो अधिनियम में सम्मिलित नहीं है, के सम्बन्ध में भी विचार करके अपनी संस्तुति मुख्यमंत्री के अनुमोदनार्थ प्रस्तुत करेगी।

स्थानान्तरण से सम्बन्धित अभिलेखों का रखा जाना
28. इस अधिनियम के अन्तर्गत स्थानान्तरण हेतु अपनाई गई प्रक्रिया सम्बन्धी पूर्ण दस्तावेज एवं समस्त अभिलेख अत्यन्त सावधानी पूर्वक संकलित करते हुए व्यवस्थित रूप में एक अलग पत्रावली में रखे जायेंगे और इन्हें प्रत्येक समय उच्चाधिकारियों के निरीक्षण हेतु तैयार रखा जायेगा। इस कार्य को सम्पादित किए जाने का दायित्व स्थानान्तरण आदेश निर्गत करने वाले सक्षम अधिकारी का होगा। यह पत्रावली कार्मिकों के निरीक्षण हेतु प्रत्येक कार्यालय दिवस पर उपलब्ध होगी तथा किसी कार्मिक को यदि पत्रावली में से किसी प्रपत्र की प्रमाणित प्रतिलिपि की आवश्यकता हो तो उसे 2 प्रति पृष्ठ शुल्क लेकर उपलब्ध कराया जा सकेगा।



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                       परिशिष्ट-1 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )

सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा जिन कार्मिकों की तैनाती जनपद मुख्यालय से लेकर ग्राम स्तर तक होती है
1. सुगम क्षेत्र:
(1) जनपद देहरादून(पर्वतीय क्षेत्र), टिहरी, चमोली, उत्तरकाशी, पौड़ी (पर्वतीय क्षेत्र), रूद्रप्रयाग,
पिथौरागढ, बागेश्वर, अल्मोड़ा चम्पावत(पर्वतीय क्षेत्र) तथा नैनीताल (पर्वतीय क्षेत्र) के ऐसे कार्यस्थल जो कि पक्के
मोटर मार्ग पर अथवा पक्के मोटर मार्ग के 1ध्2 किलोमीटर परिधि में स्थित हैं।
(2) जनपद देहरादून (मैदानी क्षेत्र), पौडी (मैदानी क्षेत्र), चम्पावत (मैदानी क्षेत्र), नैनीताल (मैदानी क्षेत्र), हरिद्वार एवं उधमसिंहनगर के ऐसे कार्यस्थल जो कि पक्के मोटर मार्ग पर अथवा पक्के मोटर मार्ग से 02 किलोमीटर परिधि में स्थित हैंः परन्तु यह कि निम्नलिखित स्थानों पर 01 वर्ष की तैनाती को 1) वर्ष की सुगम तैनाती के समतुल्य माना जायेगाः-
(1) देहरादून (2)ऋषिकेश (3) विकास नगर (4)टिहरी (5) मुनि की रेती (6) नरेन्द्र नगर(7)गोपेश्वर (8) हरिद्वार
(9)रूड़की (10)पौड़ी (11) उत्तरकाशी (12) कोटद्वार (13) श्रीनगर (14) रूद्रप्रयाग (15) पिथौेरागढ़ (16)
बागेश्वर (17) अल्मोड़ा (18)रानीखेत (19)रूद्रपुर (20)काशीपुर (21)किच्छा (22)टनकपुर (23)चम्पावत (24)
लोहाघाट (25) नैनीताल (26)हल्द्वानी (27)रामनगर।
2. दुर्गम क्षेत्र:
(1) उक्त 1 सुगम क्षेत्र (1) में अंकित क्षेत्रों के ऐसे कार्यस्थल, जो पक्के मोटर मार्ग के 1/2 किलोमीटर से अधिक पैदल दूरी पर स्थित हैं।
(2) उक्त 1 सुगम क्षेत्र (2) में अंकित क्षेत्रों के ऐसे कार्यस्थल, जो पक्के मोटर मार्ग के 02
किलोमीटर से अधिक पैदल दूरी पर स्थित हैं। परन्तु यह कि 2 उक्त 2 दुर्गम क्षेत्र (1) के ऐसे दुर्गम कार्यस्थल जो पक्के मोटर मार्ग से 05
किलोमीटर से अधिक पैदल दूरी पर स्थित हैं, अथवा उक्त 2 दुर्गम क्षेत्र (2) के ऐसे दुर्गम कार्यस्थल जो पक्के मोटर मार्ग से 10 किलोमीटर से अधिक पैदल दूरी पर स्थित हैं अथवा राज्यान्तर्गत कोई भी ऐसा कार्यस्थल जो 7000 फीट से अधिक ऊॅचाई पर स्थित हंै, वहाॅ 01 वर्ष की तैनाती को 02 वर्ष की दुर्गम तैनाती के समतुल्य माना जायेगा
                 
          परिशिष्ट-2 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )

सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा- जिन कार्मिकों की तैनाती जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, विकास खण्ड मुख्यालय, नगर निगम/नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत क्षेत्र में होती हैः-
                                 जनपद:- देहरादून
1. सुगम क्षेत्र:
(1 )जनपद मुख्यालय पर स्थित कार्य-स्थल
(2) निम्न नगर निगम/नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थल:-
(क) नगर निगम:- (क) देहरादून
(ख) नगर पालिका परिषदः- (क) मसूरी (ख) ऋषिकेश (ग)विकासनगर (घ) हरबर्टपुर (ङ) डोईवाला
(3) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः- (क) रायपुर (ख) डोईवाला (ग) विकासनगर (घ) सहसपुर
2. दुर्गम क्षेत्र:
निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः- (क) कालसी (ख) चकराता
         

TRANSFER

                  

               परिशिष्ट-2 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )

सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा-जिन कार्मिकों की तैनाती जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, विकास खण्ड मुख्यालय, नगर पालिका परिषद /नगर पंचायत क्षेत्र में होती हैः- जनपद:- टिहरी
1. सुगम क्षेत्र
(1) जनपद मुख्यालय पर स्थित कार्य-स्थल
(2) निम्न नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थल:
(क) नगर पालिका परिषदः- (क ) टिहरी (ख) नरेन्द्रनगर (ग) देवप्रयाग (घ) चम्बा (ङ) मुनिकीरेती
(ख) नगर पंचायतः- (क) कीर्तिनगर
(3) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः-
(ग) नरेन्द्रनगर (ख)चम्बा (ग) जौनपुर (घ) कीर्तिनगर (ङ) थौलधार
2. दुर्गम क्षेत्र:
(1) निम्न नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्यस्थलः- (क) घनसाली (ख) गजा (ग) लम्बगाॅव (घ) चमियाला
(2) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः- (क) देवप्रयाग (ख) भिलंगना (ग) प्रतापनगर (घ) जाखणीधार
परन्तु  यह कि जो कार्य-स्थल 7000 फीट से अधिक ऊॅचाई पर स्थित है, वहां 1 वर्ष की तैनाती को 2 वर्ष की दुर्गम क्षेत्र में तैनाती के समतुल्य माना जाएगा।
                          परिशिष्ट-2 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )

सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा-जिन कार्मिकों की तैनाती जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, विकास खण्ड मुख्यालय, नगर पालिका परिषद /नगर पंचायत क्षेत्र में होती हैः- जनपद:- चमोली
1. सुगम क्षेत्र:
(1) जनपद मुख्यालय पर स्थित कार्य-स्थल
(2) निम्न नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः- (क) नगर पालिका परिषदः- (क) गोपेश्वर (ख) गौचर (ग) कर्णप्रयाग (ख) नगर पंचायतः- (क) नन्दप्रयाग (ख) गैणसैण
(3) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः- (क) दशोली (ख) कर्णप्रयाग (ग) गैरसैंण
2. दुर्गम क्षेत्र:
(1.) निम्न नगर पालिका परिषद क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः- जोशीमठ
(2) निम्न नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः- (क) बद्रीनाथ(ख)पोखरी(ग) थराली(घ) पीपलकोटी
(3) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः- (क) घाट (ख) नारायणबगड़ (ग) थराली (घ) जोशीमठ (ङ)पोखरी (च) देवाल
परन्तु यह कि जो कार्य-स्थल 7000 फीट से अधिक ऊॅचाई पर स्थित है, वहां 1 वर्ष की तैनाती को 2 वर्ष की दुर्गम क्षेत्र में तैनाती के समतुल्य माना जाएगा।
    
                   परिशिष्ट-2 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )

सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा जिन कार्मिकों की तैनाती जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, विकास खण्ड मुख्यालय, नगर निगम/नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत क्षेत्र में होती हैः- जनपद:- हरिद्वार
1. सुगम क्षेत्र:
(1) जनपद मुख्यालय पर स्थित कार्य-स्थल
(2) निम्न नगर निगम/नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः- (क) नगर निगम:- (क) हरिद्वार (ख) रूड़की
(क) नगर पालिका परिषदः- (क) मंगलौर (ख)लक्सर (ग) शिवालिक नगर (ग) नगर पंचायतः- (क) झबरेड़ा (ख) लण्ढौरा (ग)पिरानकलियर (घ) भगवानपुर
(3) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः- (क) नारसन (ख) बहादराबाद (ग) रूड़की (घ) भगवानपुर (ङ) खानपुर
2-दुर्गम क्षेत्र शून्य

        परिशिष्ट-2 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )

सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा-जिन कार्मिकों की तैनाती जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, विकास खण्ड मुख्यालय, नगर पालिका परिषद /नगर पंचायत क्षेत्र में होती हैः- जनपद:- उत्तरकाशी
1. सुगम क्षेत्र:
(1) जनपद मुख्यालय पर स्थित कार्य-स्थल
(2) निम्न नगर पालिका परिषद क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः- (क) उत्तरकाशी (ख) चिन्यालीसौंड(ग) बड़कोट
(3) निम्न नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः- नौगाॅव
(3) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः- (क) चिन्यालीसौड़ (ख) डुण्डा (ग) नौगाॅव
2. दुर्गम क्षेत्र:
.(1) निम्न नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः- (क)गंगोत्री (ख) पुरोला
(2) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः-
(क) मोरी (ख) भटवाड़ी (ग) पुरोला परन्तु यह कि जो कार्य-स्थल 7000 फीट से अधिक ऊॅचाई पर स्थित है, वहां 1 वर्ष की तैनाती को 2 वर्ष की दुर्गम क्षेत्र में तैनाती के समतुल्य माना जाएगा।

                      परिशिष्ट-2 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )

सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा-जिन कार्मिकों की तैनाती जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, विकास खण्ड मुख्यालय, नगर पालिका परिषद /नगर पंचायत क्षेत्र में होती हैः- जनपद:- पौड़ी
1. सुगम क्षेत्र:
(1) जनपद मुख्यालय पर स्थित कार्य-स्थल
(.2) निम्न नगर पालिका परिषद क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः- (क) पौड़ी (ख) दुगड्डा (ग) श्रीनगर (घ) कोटद्वार
(3) निम्न नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः- (क)स्वर्गाश्रम (जौंेक) (ख) सतपुली
(4) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः- (क) खिर्सू (ख) कोट (ग) जहरीखाल (घ) कल्जीखाल (ङ) द्वारीखाल (च) दुगड्डा (छ) पौड़ी
2. दुर्गम क्षेत्र:
निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः- (क) पावों (ख) एकेश्वर (ग) रिखणीखाल (घ) बीरांेखाल (ङ) पोखडा़ (च) नैनीडांडा (छ) यमकेश्वर (ज) थलीसैण
परन्तु यह कि जो कार्य-स्थल 7000 फीट से अधिक ऊॅचाई पर स्थित है, वहां 1 वर्ष की तैनाती को 2 वर्ष की दुर्गम क्षेत्र में तैनाती के समतुल्य माना जाएगा।

                      परिशिष्ट-2 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )


सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा-जिन कार्मिकों की तैनाती जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, विकास खण्ड
मुख्यालय, नगर पालिका परिषद /नगर पंचायत क्षेत्र में होती हैः-
                              जनपद:- रूद्रप्रयाग
1. सुगम क्षेत्र:
(1) जनपद मुख्यालय पर स्थित कार्य-स्थल
(2) निम्न नगर पालिका परिषद क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः- रूद्रप्रयाग
(3) निम्न नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः- (क) अगस्त्यमुनि (ख) तिलवाड़ा
(4) निम्न विकास खण्ड मुख्यालय में स्थित कार्य-स्थलः- अगस्तमुनि
2. दुर्गम क्षेत्र:
(1) निम्न नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः- (क) उखीमठ (ख) केदारनाथ
(3) निम्न विकास खण्ड मुख्यालय में स्थित कार्य-स्थलः- जखोली
परन्तु यह कि जो कार्य-स्थल 7000 फीट से अधिक ऊॅचाई पर स्थित है, वहां 1 वर्ष की तैनाती को 2 वर्ष की दुर्गम क्षेत्र में तैनाती के समतुल्य माना जाएगा।

                         परिशिष्ट-2 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )

सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा-जिन कार्मिकों की तैनाती जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, विकास खण्ड मुख्यालय, नगर पालिका परिषद /नगर पंचायत क्षेत्र में होती हैः- जनपद-पिथौरागढ़
1. सुगम क्षेत्र:
(1) जनपद मुख्यालय पर स्थित कार्य-स्थल
(2) निम्न नगर पालिका परिषद क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः-
(क) पिथौरागढ (ख) डीडीहाट
(3) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः-
(क) मूनाकोट (ख) कनालीछीना (ग) बिण
2. दुर्गम क्षेत्र:
(1) निम्न नगर पालिका/नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः-
(क) नगर पालिका परिषदः- धारचूला
(ख) नगर पंचायत:- (क)बेरीनाग (ख)गंगोलीहाट
(2) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः-
(क)मुनस्यारी (ख) गंगोलीहाट (ग) धारचूला (घ) बेरीनाग (ङ)डीडीहाट
परन्तु यह कि जो कार्य-स्थल 7000 फीट से अधिक ऊॅचाई पर स्थित है, वहां 1 वर्ष की तैनाती को 2 वर्ष की दुर्गम क्षेत्र में तैनाती के समतुल्य माना जाएगा।

                     

    परिशिष्ट-2 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )


सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा-जिन कार्मिकों की तैनाती जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, विकास खण्ड मुख्यालय, नगर पालिका परिषद /नगर पंचायत क्षेत्र में होती हैः- जनपद-बागेश्वऱ
1. सुगम क्षेत्र:
(1) जनपद मुख्यालय पर स्थित कार्य-स्थल
(2) निम्न नगर पालिका परिषद में स्थित कार्य-स्थलः- बागेश्वर
.(3) निम्न विकास खण्ड मुख्यालय में स्थित कार्य-स्थलः- (क) बागेश्वर (ख) गरूड़
2. दुर्गम क्षेत्र:
(1) निम्न नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः- कपकोट
(2) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः- कपकोट
 परन्तु यह कि जो कार्य-स्थल 7000 फीट से अधिक ऊॅचाई पर स्थित है, वहां 1 वर्ष की तैनाती को 2 वर्ष की दुर्गम क्षेत्र में तैनाती के समतुल्य माना जाएगा।
                           परिशिष्ट-2 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )

सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा -जिन कार्मिकों की तैनाती जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, विकास खण्ड मुख्यालय, नगर पालिका परिषद /नगर पंचायत, छावनी परिषद क्षेत्र में होती हैः-  
                                   जनपद-अल्मोड़ा

1. सुगम क्षेत्र:
(1) जनपद मुख्यालय पर स्थित कार्य-स्थल
(2) निम्न नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत, छावनी बोर्ड में स्थित कार्य-स्थलः-
(क) नगर पालिका परिषदः- (क)अल्मोड़ा(ख)चिलियानौला
(ख) नगर पंचायतः- (क)द्वाराहाट (ख) भतरौंजखान
(ग) छावनी बोर्डः- रानीखेत
(3) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः-
(क) ताड़ीखेत (ख) चैखुटिया (ग) हवालबाग (घ) द्वाराहाट

2. दुर्गम क्षेत्र:
(1) निम्न नगर पंचायत क्षेत्र स्थित कार्य-स्थलः- भिकियाॅसैण
(2) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः-
(क) लमगड़ा (ख) धौलादेवी (ग) भैसियाछाना (घ) भिकियासैंण
(ङ)स्यालदे (च) ताकुला (छ) सल्ट
परन्तु यह कि जो कार्य-स्थल 7000 फीट से अधिक ऊॅचाई पर स्थित है, वहां 1 वर्ष की तैनाती को 2 वर्ष की दुर्गम क्षेत्र में तैनाती के समतुल्य माना जाएगा।

                       परिशिष्ट-2 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )


 सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा


जिन कार्मिकों की तैनाती जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, विकास खण्ड मुख्यालय, नगर निगम/नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत,क्षेत्र में होती हैः- जनपद-उधमसिंह नगर
1. सुगम क्षेत्र:
(1) जनपद मुख्यालय पर स्थित कार्य-स्थल
(.2) निम्न नगर निगम/नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः-
(क) नगर निगमः- (क) रूद्रपुर (ख) काशीपुर
(ख) नगर पालिका परिषदः- (क) जसपुर (ख) गदरपुर
(ग) बाजपुर (घ) किच्छा
(ङ) खटीमा (च) सितारगंज (छ) महुवाखेड़ागंज
(ग) नगर पंचायतः- (क) महुवाडाबरा (ख) सुलतानपुर
(ग) कैलाखेड़ा (घ) शक्तिगढ़ (ङ) दिनेशपुर (च) गुलरभोज (छ)नानकमत्ता
(3) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः- (क) रूद्रपुर (ख)सितारगंज (ग)खटीमा (घ) काशीपुर (ङ) बाजपुर (च) गदरपुर (छ)जसपुर
2. दुर्गम क्षेत्र: शून्य

                 परिशिष्ट-2 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )


 सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा

 जिन कार्मिकों की तैनाती जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, विकास खण्ड  मुख्यालय, नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत, क्षेत्र में होती हैः-               जनपद-चम्पावत
1. सुगम क्षेत्र:
(1) जनपद मुख्यालय पर स्थित कार्य-स्थल
(2) निम्न नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः-
(क) नगर पालिका परिषदः- (क) टनकपुर (ख) चम्पावत
(ख) नगर पंचायतः- (क) लोहाघाट (ख) बनवसा
(3) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः-
(क) चम्पावत (ख) लोहाघाट
  2. दुर्गम क्षेत्र: निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः- (क) पाटी (ख) बाराकोट परन्तु यह कि जो कार्य-स्थल 7000 फीट से अधिक ऊॅचाई पर स्थित है, वहां 1 वर्ष की तैनाती को 2 वर्ष की दुर्गम क्षेत्र में तैनाती के समतुल्य माना जाएगा।

                         परिशिष्ट-2 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )


 सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा जिन कार्मिकों की तैनाती जनपद मुख्यालय, तहसील मुख्यालय, विकास खण्ड मुख्यालय, नगर निगम/नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत,क्षेत्र में होती हैः-   जनपद-नैनीताल


1. सुगम क्षेत्र:
(1) जनपद मुख्यालय पर स्थित कार्य-स्थल
.(2) निम्न नगर निगम/नगर पालिका परिषद/नगर पंचायत क्षेत्र में स्थित कार्य-स्थलः-
(क) नगर निगम:- (क) हल्द्वानी
(ख) नगर पालिका परिषद:- (क) नैनीताल (ख) भवाली (ग) रामनगर
(ग) नगर पंचायत:- (क) भीमताल (ख) लालकुंआ (ग) कालाढंूगी

(3) निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः- (क) रामनगर (ख) हल्द्वानी (ग) भीमताल

2. दुर्गम क्षेत्र: निम्न विकास खण्ड मुख्यालयों में स्थित कार्य-स्थलः- (क) धारी (ख) बेतालघाट (ग) रामगढ ़(घ) ओंखलकांडा (ङ) कोटाबाग परन्तु यह कि जो कार्य-स्थल 7000 फीट से अधिक ऊॅचाई पर स्थित है, वहां 1 वर्ष की तैनाती को 2 वर्ष की दुर्गम क्षेत्र में तैनाती के समतुल्य माना जाएगा।


  मई 2008 से दिसम्बर 2014 तक सीधी भर्ती/मृतक आश्रित/25 प्रतिशत/5 प्रतिशत/कोर्ट केस एवं मण्डल परिवर्तन के अन्तर्गत नियुक्त स्नातक वेतनक्रम के अध्यापक/अध्यापिकाओ की अनन्तिम ज्येष्ठता सूची



                परिशिष्ट-3 ( देखिए धारा 3 का खण्ड (झ) )


 सुगम तथा दुर्गम क्षेत्र की परिभाषा जिन कार्मिकों की तैनाती केवल जिला मुख्यालय/निदेशालय मुख्यालय पर की जाती हैः-


1-सुगम क्षेत्रः- निम्न जनपदः-
1-देहरादून 2-हरिद्वार 3-उधमसिंह नगर 4-नैनीताल 5- अल्मोडा 6-टिहरी

2-दुर्गम क्षेत्रः- निम्न जनपदः
 1-पौडी 2-उत्तरकाशी 3-चमोली 4-रूद्रप्रयाग 5- चम्पावत 6-बागेश्वर 7- पिथौरागढ

seniority list lt from 2008 to 2014


पी डी एफ मैं डाउनलोड करने के लिए करे — transfer bill uttrakhand 2017

4 टिप्पणी

  1. स्थानान्तरण विधेयक में ऐसे पति/पत्नी के स्थानान्तरण की व्यवस्था नही दी गई है जो उत्तराखण्ड में ही प्राइभेट सेवा में कार्यरत हो

  2. सुगम से दुर्गम एबं दुर्गम से सुगम प्रधानाचार्य की पात्रता सूची incomplete है तथा अपलोड सूची मैं केवल 24 नाम है जबकि रिक्तियों की सूची मैं लगभग 300 पद रिक्त है सूची एक्ट के अनुसार अपलोड नही की गई है।

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